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97% मुस्लिम आबादी वाले इस प्रदेश में 47 साल बाद हुआ बड़ा बदलाव, अब शराब बिक्री को मिली मंजूरी

 


हाइलाइट्स

  • लक्षद्वीप शराब नीति में 47 वर्षों बाद सबसे बड़ा बदलाव, पूर्ण शराबबंदी समाप्त।

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद नया आबकारी विनियमन-2026 लागू।

  • अधिकृत होटल, रिसॉर्ट और लाइसेंसधारी संस्थानों को शराब बिक्री की अनुमति।

  • प्रशासन का दावा, पर्यटन और राजस्व बढ़ाने में मिलेगी मदद।

  • स्थानीय धार्मिक संगठनों और नेताओं ने फैसले पर जताई आपत्ति।

लक्षद्वीप शराब नीति में ऐतिहासिक बदलाव, खत्म हुई 47 साल पुरानी शराबबंदी

देश के सबसे छोटे केंद्र शासित प्रदेशों में शामिल लक्षद्वीप में एक ऐसा फैसला लिया गया है जिसने पूरे देश में नई बहस छेड़ दी है। लगभग 47 वर्षों तक लागू रही पूर्ण शराबबंदी को समाप्त करते हुए प्रशासन ने नई लक्षद्वीप शराब नीति लागू कर दी है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिलने के बाद लागू हुए लक्षद्वीप आबकारी विनियमन-2026 ने वर्ष 1979 से प्रभावी उस कानून को समाप्त कर दिया है जिसके तहत द्वीपसमूह में शराब की बिक्री और वितरण पर लगभग पूर्ण प्रतिबंध था।

नई लक्षद्वीप शराब नीति के लागू होने के साथ ही अब शराब के निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन और बिक्री के लिए कानूनी ढांचा तैयार हो गया है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति देने के उद्देश्य से उठाया गया है।

क्यों लागू की गई थी शराबबंदी?

मुस्लिम बहुल आबादी और सामाजिक मान्यताएं

लक्षद्वीप की करीब 96.5 प्रतिशत आबादी मुस्लिम समुदाय से संबंधित है। इस्लाम धर्म में शराब के सेवन को प्रतिबंधित माना जाता है। इसी कारण वर्ष 1979 में यहां पूर्ण शराबबंदी लागू की गई थी।

पिछले लगभग पांच दशकों से यह व्यवस्था केवल एक कानूनी नियम नहीं बल्कि द्वीपों की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन चुकी थी। ऐसे में लक्षद्वीप शराब नीति में आया यह बदलाव स्थानीय स्तर पर चर्चा और विवाद का विषय बन गया है।

अपवाद के रूप में बंगारम द्वीप

हालांकि शराबबंदी पूरी तरह लागू होने के बावजूद बंगारम द्वीप के कुछ विशेष रिसॉर्ट्स में विदेशी पर्यटकों के लिए सीमित रूप से शराब उपलब्ध कराई जाती थी। लेकिन अब नई लक्षद्वीप शराब नीति के तहत यह व्यवस्था अन्य अधिकृत पर्यटन स्थलों तक भी विस्तारित की जा सकती है।

सरकार ने क्यों लिया यह बड़ा फैसला?

पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने की तैयारी

प्रशासन का तर्क है कि लक्षद्वीप को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। प्राकृतिक सुंदरता, स्वच्छ समुद्र तट और समुद्री जैव विविधता के बावजूद लक्षद्वीप अभी भी अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर उतनी मजबूत स्थिति नहीं बना पाया है जितनी मालदीव जैसे देशों ने बनाई है।

नई लक्षद्वीप शराब नीति को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि विदेशी पर्यटक अक्सर उन पर्यटन स्थलों को प्राथमिकता देते हैं जहां उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध हों। ऐसे में शराब बिक्री की नियंत्रित अनुमति पर्यटन उद्योग को प्रतिस्पर्धी बना सकती है।

राजस्व बढ़ाने की उम्मीद

नई लक्षद्वीप शराब नीति से प्रशासन को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होने की भी संभावना है। शराब पर लगाए गए आबकारी शुल्क, लाइसेंस फीस और अन्य करों के माध्यम से सरकार को नई आय प्राप्त होगी।

प्रशासन का दावा है कि इस आय का उपयोग स्थानीय बुनियादी ढांचे, पर्यटन सुविधाओं और विकास परियोजनाओं में किया जा सकेगा।

नई लक्षद्वीप शराब नीति में क्या हैं प्रमुख प्रावधान?

शराब पर भारी टैक्स

हालांकि शराब बिक्री को पूरी तरह खुली छूट नहीं दी गई है। नई लक्षद्वीप शराब नीति के तहत शराब पर भारी कर लगाया गया है।

इसके अनुसार:

भारतीय और विदेशी मदिरा पर

करीब 400 प्रतिशत तक आबकारी शुल्क लगाया जाएगा।

बीयर पर

लगभग 200 प्रतिशत एक्साइज ड्यूटी निर्धारित की गई है।

वाइन पर

करीब 80 प्रतिशत कर लगाया जाएगा।

इन ऊंचे करों का उद्देश्य शराब की बिक्री को नियंत्रित रखना और सरकार के लिए राजस्व सुनिश्चित करना बताया गया है।

लाइसेंस प्रणाली लागू होगी

नई लक्षद्वीप शराब नीति के तहत केवल सरकार द्वारा अधिकृत एजेंसियां, सरकारी निगम और चुनिंदा निजी संस्थान ही शराब कारोबार के लिए लाइसेंस प्राप्त कर सकेंगे।

इसका अर्थ है कि शराब की बिक्री पूरी तरह नियंत्रित और निगरानी के दायरे में रहेगी।

21 वर्ष से कम आयु वालों पर प्रतिबंध

नई व्यवस्था में 21 वर्ष से कम आयु के लोगों को शराब खरीदने या उसका सेवन करने की अनुमति नहीं होगी।

इसके अलावा प्रशासन को यह अधिकार भी दिया गया है कि किसी विशेष परिस्थिति में किसी द्वीप या क्षेत्र में पुनः प्रतिबंध लागू कर सके या अतिरिक्त नियंत्रण लगा सके।

लक्षद्वीप शराब नीति पर बढ़ा विरोध

स्थानीय संगठनों की नाराजगी

नई लक्षद्वीप शराब नीति को लेकर विरोध भी तेज हो गया है। कई सामाजिक संगठनों, धार्मिक समूहों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं।

विरोध करने वालों का कहना है कि यह निर्णय स्थानीय संस्कृति और सामाजिक परंपराओं के विपरीत है। उनका तर्क है कि शराबबंदी लंबे समय से द्वीपों की पहचान रही है और इसे समाप्त करने से सामाजिक समस्याएं बढ़ सकती हैं।

सांसद ने उठाए सवाल

लक्षद्वीप के सांसद मोहम्मद हमदुल्लाह सईद सहित कई स्थानीय नेताओं ने कहा है कि इतनी महत्वपूर्ण लक्षद्वीप शराब नीति लागू करने से पहले व्यापक जनपरामर्श किया जाना चाहिए था।

उनका आरोप है कि यह निर्णय स्थानीय जनता की इच्छाओं और भावनाओं को पर्याप्त महत्व दिए बिना लिया गया है।

पर्यटन और संस्कृति के बीच संतुलन की चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि नई लक्षद्वीप शराब नीति प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती भी लेकर आई है। एक ओर सरकार पर्यटन और आर्थिक विकास को गति देना चाहती है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय सांस्कृतिक और धार्मिक संवेदनशीलताओं को भी ध्यान में रखना होगा।

यदि पर्यटन बढ़ता है तो रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं, होटल उद्योग को लाभ मिल सकता है और स्थानीय व्यापार को भी नई ऊर्जा मिल सकती है। लेकिन यदि सामाजिक असंतोष बढ़ता है तो इसका असर प्रशासनिक व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव पर भी पड़ सकता है।

क्या बदल जाएगा लक्षद्वीप का भविष्य?

नई लक्षद्वीप शराब नीति केवल शराब बिक्री से जुड़ा प्रशासनिक फैसला नहीं है, बल्कि यह लक्षद्वीप के विकास मॉडल में बड़े बदलाव का संकेत भी माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में यह स्पष्ट होगा कि यह निर्णय पर्यटन को कितना बढ़ावा देता है और स्थानीय समाज इसे किस रूप में स्वीकार करता है।

फिलहाल इतना तय है कि 47 वर्षों तक चली पूर्ण शराबबंदी के अंत के साथ लक्षद्वीप एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। जहां सरकार इसे आर्थिक विकास और पर्यटन विस्तार का माध्यम बता रही है, वहीं विरोधी पक्ष इसे सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक मूल्यों के लिए चुनौती मान रहा है। यही कारण है कि लक्षद्वीप शराब नीति आने वाले दिनों में राष्ट्रीय स्तर पर बहस का प्रमुख विषय बनी रह सकती है।

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